
धोरैया। धोरैया थाना क्षेत्र के जोठा गांव में मंगलवार को दर्दनाक हादसे में तालाब में डूबने से दो बच्चियों की मौत हो गई। कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर स्नान करने तालाब पहुंचीं दोनों बच्चियां गहरे पानी में चली गईं और डूब गईं। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियों को तालाब से बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सक ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद से मृत बच्चियों के स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी मातम का माहौल है।
मृतकों की पहचान जोठा गांव निवासी कांग्रेस लैया की 12 वर्षीय पुत्री जानकी कुमारी और गुड्डू लैया की 14 वर्षीय पुत्री कोमल कुमारी के रूप में हुई है। दोनों बच्चियों की मौत की खबर जैसे ही स्वजनों और ग्रामीणों को मिली, बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल और अस्पताल की ओर पहुंचने लगे। पर्व के उल्लास के बीच हुए इस हादसे ने पूरे गांव को गम में डुबो दिया।
पर्व को लेकर तालाब गई थीं दोनों बच्चियां
स्वजनों के अनुसार कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर गांव की अन्य बच्चियों के साथ जानकी और कोमल भी तालाब में स्नान करने गई थीं। बताया जाता है कि दोनों बच्चियां तालाब में स्नान कर रही थीं। इसी दौरान वे तालाब के गहरे हिस्से में चली गईं।
प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक दोनों बच्चियों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर तालाब में छलांग लगाई थी। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने के कारण दोनों गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। उनके साथ मौजूद अन्य बच्चियों ने जब दोनों को पानी में डूबते देखा तो घबरा गईं और तत्काल गांव की ओर दौड़ीं।
बच्चियों ने गांव पहुंचकर स्वजनों और ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीण बिना देर किए तालाब की ओर दौड़े और बच्चियों को तलाशने के लिए पानी में उतर गए।
ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद निकाला
घटना की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने तालाब में बच्चियों की तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला गया। उस समय दोनों अचेत अवस्था में थीं। ग्रामीणों और स्वजनों को उम्मीद थी कि शायद उपचार के बाद दोनों की जान बचाई जा सकेगी।
इसके बाद दोनों बच्चियों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने दोनों की जांच की। जांच के बाद चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। जैसे ही चिकित्सकों ने बच्चियों की मौत की पुष्टि की, अस्पताल में मौजूद स्वजनों में चीख-पुकार मच गई।
मौत की खबर से स्वजनों में कोहराम
जानकी और कोमल की मौत की खबर उनके परिवारों के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पर्व के मौके पर घर से तालाब में स्नान करने निकली दोनों बच्चियां वापस नहीं लौट सकीं। हादसे के बाद परिवार के सदस्यों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कुछ समय पहले तक उनके साथ रहने वाली बच्चियां अब इस दुनिया में नहीं हैं।
मृत बच्चियों के घरों पर लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों के विलाप से माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीण भी परिवार को ढांढस बंधाते नजर आए। एक साथ दो बच्चियों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर है।
पर्व की खुशियां मातम में बदलीं
कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर गांव में उत्साह का माहौल था। बच्चियां पर्व की तैयारियों और परंपरा के तहत स्नान के लिए तालाब पहुंची थीं। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पर्व का यह दिन परिवार के लिए इतनी बड़ी त्रासदी लेकर आएगा।
हादसे के बाद गांव में पर्व की खुशियां मातम में बदल गईं। ग्रामीणों के बीच तालाब में स्नान के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के गहरे हिस्सों को चिह्नित करने और बच्चों को अकेले पानी में जाने से रोकने की जरूरत है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, पोखर और अन्य जलस्रोत अक्सर स्नान तथा दैनिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे स्थानों पर पानी की गहराई का पता नहीं होने के कारण बच्चों के लिए खतरा बना रहता है। मंगलवार को जोठा गांव में हुआ हादसा भी इसी तरह की सावधानी की जरूरत को सामने लाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के तालाब या अन्य गहरे जलस्रोतों पर जाने के दौरान अभिभावकों अथवा किसी बड़े व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी है। खासकर पर्व-त्योहार के दौरान जब बड़ी संख्या में लोग जलस्रोतों पर पहुंचते हैं, तब सुरक्षा के इंतजाम और निगरानी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
जोठा गांव में दो बच्चियों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं पूरे गांव में शोक का माहौल है। पर्व के अवसर पर हुआ यह हादसा ग्रामीणों के लिए लंबे समय तक पीड़ादायक स्मृति बना रहेगा।





